कांग्रेस का कहना है कि उसे कई विपक्षी दलों से समर्थन हासिल हुआ है.
हालांकि लेफ्ट पार्टियों ने अलग से भारत बंद का आह्वान किया है.
सोमवार को होने वाले बंद की व्यापकता के बारे में कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने बताया, ''कांग्रेस ने भारत बंद की अपील की है और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया है. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमत लगातार बढ़ रही है. जब इनकी क़ीमत बढ़ती है तो आम आदमी भी परेशान होता है. इसलिए जनता से हमें इस पर भरपूर समर्थन मिलेगा.''
उन्होंने कहा कि ये सही है कि यूपीए की सरकार के मुकाबले वर्तमान में कच्चे तेल के दाम कम हैं, लेकिन सरकार ने इस पर 11 लाख करोड़ रुपये टैक्स लगा दिया है. ये दोगुने से भी ज़्यादा टैक्स है.
बंद से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को लेकर शकील अहमद ने कहा, ''अर्थव्यवस्था को मोदी जी ने बहुत नुकसान पहुंचाया है. विपक्षी दल का काम है लोगों और मीडिया को साथ लेकर सरकार पर दबाव बनाना ताकि वो अपने ग़लत कदमों को वापस ले.''
उन्होंने कहा कि इस बंद में दंगा फ़साद और किसी तरह की हिंसा नहीं होगी. बस बंद का समर्थन करने और उसमें शामिल होने के लिए लोगों अपील की जाएगी. जेपी सरकार के ख़िलाफ़ इस बंद को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि 'डीज़ल और पेट्रोल के दाम वैश्विक कारणों ये बढ़ रहे हैं. सरकार जनता की परेशानी देख रही है और इसके लिए उपाय भी करेगी. लेकिन, सरकार में आर्थिक फ़ैसले ज़रूरत के हिसाब से लिए जाते हैं न किसी राजनीतिक दबाव में.'
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि उन्होंने साल में पेट्रोलियम की क़ीमतों पर सब्सिडी दी तो उसके लिए बजट में प्रावधान क्यों नहीं किया. उन्होंने 1 लाख 40 हजार करोड़ के ऑयल बॉण्ड जारी कर दिए. अब 2024 तक आठ प्रतिशत ब्याज की दर से सरकार को उसे वापस करना है.
यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें बढ़ने पर बीजेपी ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. इस पर गोपाल अग्रवाल का कहना है कि उस वक्त और आज में काफ़ी अंतर है. तब महंगाई दर नौ प्रतिशत से ज़्यादा थी और अब पांच फ़ीसदी से नीचे है. तब जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार गिर रहा था जो अब बढ़ रहा है. अर्थव्यवस्था के मामले में सिर्फ़ एक ही फ़ैक्टर नहीं देखना चाहिए.
वहीं, भारत बंद को समर्थन देने से शिवसेना ने इनकार कर दिया है, लेकिन राज ठाकरे की नवनिर्माण सेना इसमें हिस्सा ले रही है.
मोदी सरकार पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों और रुपये की घटती कीमतों के कारण विपक्ष के निशाने पर बनी हुई है. विपक्ष इसके लिए सरकार की आर्थिक नीतियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है.
भारत बंद से पहले रविवार की शाम को मशाल जुलूस भी निकाला गया. लिस का कहना है कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक व्यक्ति ने चाक़ू से हमला करके सात लोगों को घायल कर दिया है. इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है.
घटना के वक्त लोग एक नहर के किनारे खेल रहे थे, जिन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश भी की थी.
हमले के सिलसिले में जिस व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, कहा जा रहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान का है. इस घटना को फ़िलहाल चरमपंथी हमला नहीं माना जा रहा है.
एक प्रत्यक्षदर्शी युसूफ़ नजाह का कहना है कि जब वो नहर के किनारे टहल रहे थे, उन्होंने एक व्यक्ति को दौड़ते देखा जिसके हाथ में लगभग 25-30 सेंटीमीटर लंबा चाक़ू था.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लगभग 20 लोग हमलावर का पीछा कर रहे थे.किन पुलिस के एंटी क्राइम दस्ते ने हमलावर को दबोच लिया. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इस घटना की बारीकी से जांच की जा रही है.
फ्रांस में चाक़ू से हमले की पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएं हुई हैं. इनमें से कुछ ही घटनाओं की चरमपंथी हमले के नज़रिए से जांच की गई है.
सोमवार को होने वाले बंद की व्यापकता के बारे में कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने बताया, ''कांग्रेस ने भारत बंद की अपील की है और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया है. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमत लगातार बढ़ रही है. जब इनकी क़ीमत बढ़ती है तो आम आदमी भी परेशान होता है. इसलिए जनता से हमें इस पर भरपूर समर्थन मिलेगा.''
उन्होंने कहा कि ये सही है कि यूपीए की सरकार के मुकाबले वर्तमान में कच्चे तेल के दाम कम हैं, लेकिन सरकार ने इस पर 11 लाख करोड़ रुपये टैक्स लगा दिया है. ये दोगुने से भी ज़्यादा टैक्स है.
बंद से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को लेकर शकील अहमद ने कहा, ''अर्थव्यवस्था को मोदी जी ने बहुत नुकसान पहुंचाया है. विपक्षी दल का काम है लोगों और मीडिया को साथ लेकर सरकार पर दबाव बनाना ताकि वो अपने ग़लत कदमों को वापस ले.''
उन्होंने कहा कि इस बंद में दंगा फ़साद और किसी तरह की हिंसा नहीं होगी. बस बंद का समर्थन करने और उसमें शामिल होने के लिए लोगों अपील की जाएगी. जेपी सरकार के ख़िलाफ़ इस बंद को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि 'डीज़ल और पेट्रोल के दाम वैश्विक कारणों ये बढ़ रहे हैं. सरकार जनता की परेशानी देख रही है और इसके लिए उपाय भी करेगी. लेकिन, सरकार में आर्थिक फ़ैसले ज़रूरत के हिसाब से लिए जाते हैं न किसी राजनीतिक दबाव में.'
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि उन्होंने साल में पेट्रोलियम की क़ीमतों पर सब्सिडी दी तो उसके लिए बजट में प्रावधान क्यों नहीं किया. उन्होंने 1 लाख 40 हजार करोड़ के ऑयल बॉण्ड जारी कर दिए. अब 2024 तक आठ प्रतिशत ब्याज की दर से सरकार को उसे वापस करना है.
यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें बढ़ने पर बीजेपी ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. इस पर गोपाल अग्रवाल का कहना है कि उस वक्त और आज में काफ़ी अंतर है. तब महंगाई दर नौ प्रतिशत से ज़्यादा थी और अब पांच फ़ीसदी से नीचे है. तब जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार गिर रहा था जो अब बढ़ रहा है. अर्थव्यवस्था के मामले में सिर्फ़ एक ही फ़ैक्टर नहीं देखना चाहिए.
वहीं, भारत बंद को समर्थन देने से शिवसेना ने इनकार कर दिया है, लेकिन राज ठाकरे की नवनिर्माण सेना इसमें हिस्सा ले रही है.
मोदी सरकार पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों और रुपये की घटती कीमतों के कारण विपक्ष के निशाने पर बनी हुई है. विपक्ष इसके लिए सरकार की आर्थिक नीतियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है.
भारत बंद से पहले रविवार की शाम को मशाल जुलूस भी निकाला गया. लिस का कहना है कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक व्यक्ति ने चाक़ू से हमला करके सात लोगों को घायल कर दिया है. इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है.
घटना के वक्त लोग एक नहर के किनारे खेल रहे थे, जिन्होंने हमलावर को रोकने की कोशिश भी की थी.
हमले के सिलसिले में जिस व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, कहा जा रहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान का है. इस घटना को फ़िलहाल चरमपंथी हमला नहीं माना जा रहा है.
एक प्रत्यक्षदर्शी युसूफ़ नजाह का कहना है कि जब वो नहर के किनारे टहल रहे थे, उन्होंने एक व्यक्ति को दौड़ते देखा जिसके हाथ में लगभग 25-30 सेंटीमीटर लंबा चाक़ू था.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लगभग 20 लोग हमलावर का पीछा कर रहे थे.किन पुलिस के एंटी क्राइम दस्ते ने हमलावर को दबोच लिया. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इस घटना की बारीकी से जांच की जा रही है.
फ्रांस में चाक़ू से हमले की पिछले कुछ महीनों में कई घटनाएं हुई हैं. इनमें से कुछ ही घटनाओं की चरमपंथी हमले के नज़रिए से जांच की गई है.
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