पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि वो परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन भारत को भी ऐसा ही करना होगा.
अमरीकी दौरे पर गए इमरान ख़ान ने फ़ॉक्स न्यूज़ के पत्रकार ब्रेट बेयर को दिए इंटरव्यू में ये बात कही है.ब्रेट बेयर ने इमरान ख़ान से पूछा, ''अगर भारत कहता है कि वो परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार है तो क्या पाकिस्तान भी ऐसा ही करेगा?''
इस सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा, ''हाँ, क्योंकि परणाणु युद्ध कोई विकल्प नहीं है. पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध का आइडिया ख़ुद से ख़ुद को बर्बाद करना होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों देशों के बीच ढाई हज़ार मील की सीमा लगती है.''
पीएम ख़ान ने कहा कि दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध पूरे उपमहाद्वीप के लिए ख़तरनाक होगा. ख़ान ने कहा कि फ़रवरी में दोनों देशों के बीच जो कुछ भी हुआ उसके बाद से सरहद पर तनाव है.
इमरान ख़ान ने कहा, ''पाकिस्तान में एक भारतीय लड़ाकू विमान को मार गिराया गया था. इन्हीं चीज़ों को देखते हुए मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से कहा कि वो भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ बनकर अपनी भूमिका निभा सकते हैं. अमरीका दुनिया का सबसे ताक़तवर देश है इसलिए वो एकमात्र देश है जो भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर पर मध्यस्थ की भूमिका अदा कर सकता है.''
इमरान ख़ान ने कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले 70 सालों में कश्मीर ही एक ऐसा मुद्दा है जिसके चलते एक सभ्य पड़ोसी की तरह नहीं रह पा रहे हैं.
बेयर ने ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान पर भारत की प्रतिक्रिया का भी ज़िक्र किया, जिसमें भारत ने ट्रंप के उस बयान को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि कश्मीर मामले में किसी तीसरे पक्ष की ज़रूरत नहीं है.
इस पर इमरान ख़ान ने कहा कि भारत पहले बातचीत की टेबल पर तो आए. ख़ान ने कहा कि अमरीका इसमें सकारात्मक भूमिका अदा कर सकता है.
ख़ान ने कहा, ''भारत पहले बातचीत की टेबल पर आए. हम इस मामले में अमरीका को लेकर आशावादी हैं. अमरीका और राष्ट्रपति ट्रंप निश्चित तौर पर इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं.''
इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अमरीका गए हैं. सोमवार को दोनों राष्ट्राध्यक्षों की व्हाइट हाउस में मुलाक़ात हुई.v
कहा जा रहा है कि इमरान के इस दौरे में अमरीका का मुख्य एजेंडा अफ़ग़ानिस्तान है जहां वो पिछले 18 सालों से एक संघर्ष में शामिल है जिसे अब तक अंजाम तक नहीं पहुंचा पाया है. दूसरी तरफ़ इमरान ख़ान चाहते हैं कि अमरीका ने सैन्य और आर्थिक मदद जो रोक दी थी उसे बहाल करे.
दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों का समृद्ध इतिहास रहा है लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से चीज़ें पूरी तरह से बदल गई हैं.
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